कोहिनूर : श्रृंगार और आभूषण की कहानी

कोहिनूर हीरा, जिसका अर्थ है “प्रकाश का पर्वत,” दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और विवादास्पद रत्नों में से एक है। 105.6 कैरेट का यह हीरा सदियों से कई राजाओं और साम्राज्यों के हाथों में रहा है। आज, यह लंदन के टॉवर में ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स का हिस्सा है, लेकिन इसकी स्वामित्व की बहस आज भी जारी है।

कोहिनूर की उत्पत्ति

कोहिनूर की सटीक उत्पत्ति अज्ञात है, लेकिन माना जाता है कि यह भारत के गोलकुंडा खदानों से निकला था। इसका पहला प्रलेखित उल्लेख 13वीं शताब्दी में मिलता है, हालांकि कुछ किंवदंतियाँ इसे और भी प्राचीन बताती हैं।

प्रारंभिक इतिहास और मुगल युग

यह हीरा कभी मुगल खजाने का हिस्सा था और बाबर और अकबर जैसे सम्राटों के पास रहा। यह शाहजहाँ के मयूर सिंहासन में जड़ा गया था, जिसे बेहतरीन रत्नों से सजाया गया था।

नादिर शाह का आक्रमण और फारसी युग

1739 में, फारसी शासक नादिर शाह ने भारत पर आक्रमण किया, दिल्ली को लूटा और कोहिनूर सहित मुगल खजाने पर कब्जा कर लिया। उसने ही इसे “प्रकाश का पर्वत” नाम दिया। उसकी हत्या के बाद यह हीरा फारसी और अफगानी शासकों के हाथों में घूमता रहा।

अफगान और सिख शासन

बाद में, यह हीरा महाराजा रणजीत सिंह के पास पहुँचा, जो 19वीं शताब्दी में सिख साम्राज्य के शासक थे। कहा जाता है कि उन्होंने इसे पुरी के जगन्नाथ मंदिर में दान करने की इच्छा जताई थी, लेकिन उनकी मृत्यु के कारण ऐसा नहीं हो सका।

कोहिनूर का ब्रिटिश अधिग्रहण

एंग्लो-सिख युद्ध (1849) के बाद, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने कोहिनूर को जब्त कर महारानी विक्टोरिया को सौंप दिया। इस अधिग्रहण को लेकर आज भी विवाद बना हुआ है।

हीरे का परिवर्तन

मूल रूप से 186 कैरेट का यह हीरा बाद में 105.6 कैरेट का कर दिया गया ताकि इसकी चमक बढ़ाई जा सके, लेकिन इससे इसका आकार काफी घट गया।

ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स में कोहिनूर

आज, कोहिनूर क्वीन मदर के क्राउन में जड़ा हुआ है और लंदन टॉवर में प्रदर्शित किया जाता है। इसे कई ब्रिटिश महारानियों ने पहना है, लेकिन यह अब भी उपनिवेशवाद की विरासत का प्रतीक बना हुआ है।

विवाद और स्वामित्व के दावे

भारत, पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान सभी कोहिनूर पर दावा करते हैं और इसे लौटाने की माँग करते हैं।

कोहिनूर का श्राप

मान्यता है कि कोहिनूर पुरुषों के लिए दुर्भाग्य लाता है, लेकिन महिलाओं के लिए सुरक्षित है। इस कारण केवल ब्रिटिश महारानियों ने इसे पहना है।

कोहिनूर का भविष्य

कोहिनूर को भारत लौटाने की माँगें लगातार उठती रही हैं, लेकिन ब्रिटिश सरकार इसे अपनी विरासत का हिस्सा मानती है

निष्कर्ष

कोहिनूर सिर्फ एक हीरा नहीं, बल्कि इतिहास, शक्ति और विवाद का प्रतीक है। इसका स्वामित्व सवालों के घेरे में बना हुआ है, लेकिन इसकी विरासत अमर है।

FAQs

1. कोहिनूर का मूल मालिक कौन था?
यह सबसे पहले भारतीय राजाओं के पास था और बाद में मुगलों ने इसे अपने खजाने में शामिल किया।

2. कोहिनूर इतना मूल्यवान क्यों है?
इसके विशाल आकार, सुंदरता और ऐतिहासिक महत्त्व के कारण यह बेशकीमती है।

3. क्या कोहिनूर सच में श्रापित है?
कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह पुरुषों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण माना जाता है।

4. कोहिनूर पर कौन-कौन दावा कर रहा है?
भारत, पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान इस पर दावा कर रहे हैं।

5. क्या कोहिनूर भारत को लौटाया जा सकता है?
ब्रिटेन ने अभी तक इसे लौटाने से इंकार किया है।

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